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एएबी समाचार । स्मार्ट सिटी (smart City)  सागर को ऐलीवेटेड कॉरीडोर बनाकर यातायात को व्यवस्थित बनाएं साथ ही शहर में कुछ अलग नया बने जिससे स्मार्ट सिटी अपनी पहचान स्थापित करें तभी सागर का स्मार्ट सिटी बनने का सपना सार्थक होगा। नगरीय विकास  एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ने सागर में शनिवार को स्मार्ट सिटी कमान्ड कंट्रोल सेंटर में स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा की।


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Sagar Smart City : विकास के साथ हरियाली पर भी जोर दे

मंत्री श्री सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी के का सही रूप सामने आ सके इसके लिए जरूरी है की सारे काम स्मार्ट सिटी के दिशा-निर्देशों के तहत करायें जाएँ  और सागर शहर अपनी अलग पहचान बना सके । उन्होंने विकास के साथ हरियाली पर भी जोर देते हुए कहा कि मुख्य बस स्टेण्ड से चकराघाट, गंगा मंदिर से संजय ड्राईव होते हुये वापिस बस स्टेण्ड तक ऐलीवेटेड गलियारा बनाया जाये । उन्होंने  फ्लाई ओवर की को भी जरूरी बताया और कहा कि  बड़ा बाजार, मोतीनगर, काकागंज के रहवासियों के लिये ट्राफिक की समस्या से निजात मिल सकेगी ।


Smart Roads & Beautification :स्मार्ट सिटी परियोजना की प्राथमिकता में शामिल रहे

शहर के सौदर्यीकरण के सिलसिले में उन्होंने डेरी विस्थापन, स्पोर्ट कम्पलेक्स, महिला सुविधा केन्द्र, तालाब सौन्दर्यकरण एवं स्मार्ट रोड जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराये जाने के निर्देश दिए । उन्होंने कहा कि सागर का विकास आम लोगों को अब दिखाई देगा।


Sagar Smart City : महिला सुविधा केंद्र बनें

उन्होंने कहा कि डेयरी विस्थापन का कार्य किसी एक जगह न कर शहर के चारों कोनों में किया जाये। जिससे डेयरी मालिकों को भी असुविधा नही होगी। माताएं-बहनों को महिला सुविधा केन्द्र न होने के कारण असुविधा होती है, इसलिए इस कार्य को प्राथमिकता दी जाए।



नगरीय विकास मंत्री श्री सिंह ने शहर में खेल सुविधों में इजाफा करने के लिहाज  से स्पोर्टस कम्पलेक्स के खेल परिसर में भी कुछ कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने प्रमुख रूप से बस स्टेण्ड तीनबत्ती, कोतवाली, विजय टॉकीज रोड, कटरा मस्जिद एवं राधा चौराहा की सड़कों के चौड़ीकरण के लिए ट्रैफिक सर्वे कराने के निर्देश दिए। 

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White-Revolution-now-in-Bundelkhand-बुंदेलखंड-में-पांव-पसार-रही-है-श्वेत-क्रांति

By- Madhur Tiwari @ सागर। एएबी समाचार। जिस  बुंदेलखंड को लोग सदियों से पिछड़ेपन और रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करते मजदूरों के क्षेत्र के तौर पर जानते आये हैं उस क्षेत्र में भी अब आवोहवा बदलने लगी है। लोगों के जुझारूपन और एक अच्छे नेतृत्व के चलते बुंदेलखंड अंचल में भी एक क्रांति धीरे -धीरे अंगड़ाई ले रही है। उम्मीद है कि अगर सब कुछ ठीक चलता रहा तो कोई आश्चर्य नहीं कि देश  में पहले-पहल  "ऑपरेशन फ्लड" के साथ शुरू हुई श्वेत क्रांति के जन्मस्थान के रूप में जाने जाने वाले  गुजरात के बाद श्वेत क्रांति की अलख जगाने का श्रेय बुंदेलखंड के साथ हिस्से में आ जाये ।


पथरीली जमीन और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र आज दूध उत्पादन को लेकर सागर में अपनी पहचान बना चुका है। करीब 7 साल पहले एक छोटे से स्तर पर चार से छह ग्रामीणों ने दूध कलेक्शन की शुरुआत की थी जो आज एक वृहद रूप धारण कर चुका है। बदलाव की इस इबारत को  लिखने का श्रेय अगर किसी को जा रहा है तो वह है  केसली  की देवश्री कृषक उत्पादक कंपनी ।


शुरुआत में तो एक छोटा सा स्व सहायता समूह था, लेकिन धीरे-धीरे किसानों की मेहनत के कारण आज एक कंपनी के रूप में विकसित हो गई है। हर रोज आस-पास के गांव से 4 से 5 हजार लीटर दूध का संग्रहण  कर यह संस्था स्थानीय स्तर के अलावा जबलपुर और महाराष्ट्र के जलगांव तक दूध की सप्लाई कर रही है।

Aajivika Mission Providing Technical Support : आजीविका मिशन से कंपनी को वित्तीय सहयोग


इस कंपनी को खड़ा करने में ग्रामीणों की मेहनत और लगन तो है ही, लेकिन इसमें आजीविका मिशन का विशेष योगदान रहा है। आजीविका मिशन की मदद से शुरुआत में छोटा ऋण मिला और इसके बाद आज इस संस्था ने केसली के अलावा शाहगढ़ व गढ़ाकोटा में भी 3-3 हजार लीटर क्षमता के बीमएमसीसी  (Bulk Milking & Chilling Center) स्थापित कर दिए हैं। देवश्री  ब्रांड के रूप में कम्पनी ने अपने दुग्ध उत्पादों को बाज़ार में उतारना शुरू कर दिया है ।

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Milk Collection Center - 78 गांव में बनाए संग्रहण केंद्र


व्यापार बढ़ने के बाद आज की स्थिति में देवश्री संस्था केसली क्षेत्र के 78 गांव में दुग्ध संग्रहण केंद्र (Collection Center) बना चुकी है। जिनसे क्षेत्र के 17 सौ से 18 सौ किसान परिवार जुड़े हुए हैं। इन किसानों को अपनी खेती-बाड़ी के अलावा दूध से भी अच्छी खासी इनकम हो जाती है जो इनके परिवार के संचालन में एक बड़ी मददगार साबित हुई है।

Workers AreThe ownerThemselves- खुद ही मालिक खुद ही मजदूर


आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक हरीश दुबे  व सहयोगी अनूप तिवारी  के अनुसार ग्रामीणों ने भले ही एक छोटे से स्तर से शुरुआत कर आज एक कंपनी खड़ी की  है, लेकिन आज भी वह खुद ही पूरा काम करते हैं। हजारों लीटर दूध एकत्रीकरण करने वाली संस्था के मालिक भी वही हैं और मजदूर भी वही। वह अलग से मजदूर लगाकर काम नहीं कराते हैं।

इस संस्था से जुड़े लोगों के की कड़ी  मेहनत का ही नतीजा है की कम्पनी  बे-मौसम में भी हर रोज 4 से 5 हजार लीटर दूध कर रहे एकत्रित कर रही है ।इस दुग्ध उत्पादक संघ से अब तक  17 सौ से 18 सौ दूध उत्पादकजुड़ चुके हैं ।


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 Covid-19-Updates-Sagar
एएबी समाचार@ सागर शहर में  कोविड-19 के संक्रमण का शिकार हुए मरीजों की संख्या का आंकड़ा अब अर्ध शतक के करीब पहुँचता नजर आ रहा   है | कोविड-19 संक्रमित  मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होने के मामले में अन्य प्रदेशों व प्रदेश के ही रेड ज़ोन वाले शहरों से घर लौटे लोगों को मुख्य वजह मानने वाला तबका बढ़ता जा रहा है ।  कोविड-19 संक्रमण अब उस मुकाम पर पहुँच गया है जहाँ से संक्रमण के कारण होने वाली मौत की गिनती भी शुरू हो गई है ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को  प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण से होने वाली मौत वाले शहरों की सूची में  सागर शहर का नाम भी दर्ज हो गया है

अधिष्ठाता बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय डा जी एस पटेल  के मुताबिक मंगलवार की शाम को सदर के वार्ड नं तीन के निवासी जिस मरीज को गंभीर अवस्था में कोरोना संक्रमण के संदिग्ध के तौर पर भर्ती किया गया था, रात में ही प्राप्त जांच रपट में वह कोविड-19 पाजिटिव पाया गया । इस मरीज की गंभीर हालत के चलते उसे वैंटीलेटर सपोर्ट पर रखा था लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई । यह कोरोना संक्रमण से होने वाली शहर की पहली मौत  है।
   
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बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ जीएस पटेल के मुताबिक विषाणु विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त ताजा रिपोर्ट में तीन नए कोविड-19 संक्रमित मरीज सामने आए हैं । जिसमें पहली रिपोर्ट जिला चिकित्सालय  में कार्यरत एक नर्स की है । यह 36 वर्षीय महिला वैशाली नगर की  निवासी है ।  दूसरी रिपोर्ट सदर बाजार निवासी 21 वर्षीय युवक की है । बताया गया है कि यह युवक सर्दी - खांसी की शिकायत लेकर सरकारी सर्दी-बुखार जांच केन्द्र में आया था व इसने कुछ दिन पहले  किसी स्थानीय चिकित्सक के पास भी इलाज कराया  था । तीसरी रिपोर्ट बसोना, नरयावली निवासी 16 वर्षीय किशोरी की  है । जानकारी के मुताबिक किशोरी के परिजन पेशे से मजदूर हैं और 8 मई को इंदौर से सागर आए थे।  इन तीन मामलों के साथ ही जिले में अब तक सामने आए कोरोना पाजिटिव मामलों की संख्या बढ़ कर 45 हो गई है । इनमें से ३८ सक्रिय मरीजों का  बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के कोविड-19 अस्पताल में इलाज़ चल  रहा है । दो की मौत हो चुकी है,जबकि ५ ठीक हो चुके है ।

Covid-19-Updates-Sagar-Witness-Highest-Surge-In-June
सागर,मप्र । १९ मई । एएबी । बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफी तेजी से इजाफा होता नजर आ रहा है । हालाँकि मामलों में बढ़ोतरी की कई वजहों में से दूसरे प्रदेशों व प्रदेश के अन्य शहरों से लोगों की घर वापसी एक अहम् कड़ी के रूप में सामने आता दिख रहा है ।
     

बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ जीएस पटेल के मुताबिक प्रशासन का भी अनुमान है कि कोरोना संक्रमण के पाजिटिव मामलों में सबसे ज्यादा वृद्धि जून महीने के मध्य तक आ सकती है। इसके चलते प्रशासन ने मरीजों के इलाज के चाक-चौबंद इंतजाम कर लिए हैं। डाॅ. पटेल ने बताया कि बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के कोविड अस्पताल में 540 बिस्तर सामान्य मरीज़ों व गंभीर मरीजों के लिए 120 बिस्तर, सघन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उपचार के लिए तैयार हैं।
 

इसी सिलसिले में अधिष्ठाता डाॅ. पटेल ने शहरवासियों से कोरोना के खिलाफ जंग में सहयोग की अपील करते कहा कि जो लोग भी दूसरे प्रदेशों या प्रदेश के ही अन्य शहरों से सागर आ रहे हैं वो अपने आने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें व अपनी जांच करांए जिससे उनके परिवार के सदस्य व पड़ोसी इस संक्रमण का शिकार न हो सकें।
Covid-19-Updates-Sagar-registered-Highest-Corona-Positive-Cases
सागर,मप्र । 19 मई । एएबी समाचार ।  देर रात सामने आए कोरोना संक्रमण के 16 नए पाजिटिव मामलों में से 14 मामले सदर क्षेत्र से हैं और इन संक्रमणों  का स्रोत बहुत हद तक  बाहर से आए परिजननों को  ही बताया  जा रहा  है । गांधीनगर, गुजरात से व  नासिक, महाराष्ट्र से सागर आए हैं।
 

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जो अन्य दो मामले हैं उनमे डेढ़ वर्षीय बालिका तिलकगंज इलाके की निवासी है। उसका पिता  सूरत में मजदूरी करता था और हाल ही में सागर लौटा है। दूसरा मामला नई गल्ला मंडी निवासी 20 वर्षीय युवती का है। जिनका यात्रा विवरण व संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
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एएबी समाचार । प्रदेश में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अद्यतन करने का कार्य एक मई से 14 जून, 2020 तक होगा। जनगणना-2021 के कार्य को मद्देनजर रखते हुए जनगणना कार्य निदेशालय ने राज्य शासन से एक जनवरी, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक प्रशासनिक इकाइयों की सीमा में कोई परिवर्तन न करने का अनुरोध किया है।
ग्रामीण और नगरीय दोनों क्षेत्रों के लिये मकान सूचीकरण ब्लॉक का आदर्श आकार 650-800 की जनसंख्या या 150-180 जनगणना मकान, इनमें से जो भी अधिक हो, निश्चित किया गया है। जनगणना-2021 के कार्य जनगणना-2011 के द्वितीय चरण के गणना ब्लॉकों को मूल रूप से उपयोग में लाते हुए किये जायेंगे। जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा मकान सूचीकरण कार्य के दौरान मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाने और मकानों को नम्बर देने के लिये विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।
निर्देशों में कहा गया है कि जनगणना-2021 के मकान सूचीकरण खंड  तैयार करते समय जनगणना-2011 के गणना खंड  की सीमाओं को ज्यों का त्यों रखा जाये। प्रत्येक गाँव चाहें वह जनसंख्या की दृष्टि से छोटा हो अथवा गैर-आबाद हो, फिर भी उसमें कम से कम एक मकान सूचीकरण खंड  होगा। प्रत्येक खंड  की सीमाएँ स्पष्ट रूप से निर्धारित की जायें और उनकी पहचान की जाये। मकान सूचीकरण ब्लॉक गाँव अथवा ग्राम पंचायत तहसील की सीमाओं को पार न करे। ग्रामीण और नगरीय दोनों क्षेत्रों में जहाँ तक हो सके मतदाता-सूची भाग (पोलिंग बूथ की सीमा) को अक्षुण्ण बनाये रखें। जनगणना-2021 के दौरान जनगणना-2011 के सेम्पल रजिस्ट्रीकरण प्रणाली ब्लॉकों की पहचान बनी रहे। सभी सांवधिक नगरों में, चाहें उनकी जनसंख्या का आकार कुछ भी क्यों न हो, स्लम ब्लॉक का निर्धारण किया जाये।
छोटे आकार के किन्तु साथ-साथ लगने वाले गाँव के मामले में एक प्रगणक को एक से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य दिया जायेगा। साथ-साथ लगने वाले कम से कम 6 मकान सूचीकरण खंड  से मिलकर एक पर्यवेक्षीय वृत बनेगा। चार्ज अधिकारी प्रत्येक मकान सूचीकरण खंड  की सीमाओं को चार्ज रजिस्टर में स्पष्ट रूप से लिखेंगे। जनगणना-2011 के गणना ब्लॉक एवं जनगणना-2021 के मकान सूचीकरण ब्लॉकों के बीच संबंध दिखाते हुए चार्ज अधिकारी एक सामंजस्य विवरण तैयार करेंगे।



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एएबी समाचार 'नमस्ते ओरछा'' महोत्सव 6 मार्च को ओरछा (जिला निवाड़ी) में भगवान श्रीराम के अयोध्या से ओरछा आगमन की कथा से शुरू होगा। इस ऐतिहासिक गाथा को थ्री-डी मैपिंग से जहाँगीर महल की दीवारों पर दिखाया जाएगा। इसके साथ ही शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों के बीच यहाँ विदेशी संगीतज्ञों के साथ बुंदेली गायक सुर-ताल मिलाते दिखाई देंगे। पहले दिन के कार्यक्रम का समापन बुंदेली व्यंजनों के जायके से किया जायेगा। पूरी ओरछा नगरी को रामराजा मंदिर के रंग में रंगने की कवायद शुरू की गई है।

महोत्सव का खाका  तैयार

तीन दिवसीय ओरछा महोत्सव का खाका  तैयार कर लिया गया है। देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधियों  को तीन दिन में यहाँ की संस्कृति, संगीत, पर्यावरण, भोजन आदि हर चीज से रू-ब-रू कराने की कोशिश की जा रही है। देश-विदेश से आने वाले हर क्षेत्र के प्रतिनिधियों  को ओरछा में निवेश  करने के लिए आमंत्रित किया जा सके, इस बात को ध्यान में रखकर पूरा कार्यक्रम तैयार किया गया है।
महोत्सव की उद्घाटन समारोह  में संध्या समूह   का नृत्य , क्लिंटन का संगीत प्रदर्शन , बुंदेली कलाकारों तिपन्या के साथ संतूर-वादन का कार्यक्रम होगा। दूसरे दिन 7 मार्च की शाम कंचना घाट पर बेतवा नदी की महा-आरती होगी। यहाँ पर प्रख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका शुभा मुद्गल का गायन होगा। इसके साथ ही शास्त्रीय नृत्यांगना  अदिति मंगलदास नृत्य  प्रस्तुति देंगी। इसके बाद कल्पवृक्ष के पास आयोजित संगीत कार्यक्रम में इण्डियन ओशन ग्रुप, मृग्या, स्वनन किरकिरे के गायन के साथ ही फ्रेंच गायक मनु चाव एवं बुंदेली कलाकार  कालू राम की जुगलबंदी का आनंद लोग उठायेंगे।

आसमान से निहारेंगे ओरछा की सुंदरता

कार्यक्रम में आने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को यहाँ के प्राकृतिक वातावरण से रू-ब-रू कराने के लिये प्राकृतिक पदयात्रा , योग, हेरिटेज साइकिलिंग एवं फोटोग्राफी जैसे कार्यक्रम रखे गये हैं। दूसरे दिन सुबह से सभी प्रतिनिधियों  को वन परिक्षेत्र एवं बेतवा नदी के बीच ले जाकर ये कार्यक्रम कराये जायेंगे। इसके साथ ही, ओरछा की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक सुंदरता का आसमानी मंजर दिखाने के लिये गर्म हवा से उडनेवाले गुब्बारे  से पर्यटकों को भ्रमण कराया जायेगा।

ओरछा में ई-रिक्शा

'नमस्ते ओरछा'' महोत्सव में आने वाले प्रतिनिधियों  को हर जगह ले जाने के लिये प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। यहाँ का वातावरण किसी प्रकार से प्रदूषित न हो, इसके लिये डीजल-पेट्रोल वाहनों का कम उपयोग किया जायेगा। इसके लिये प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर ई-रिक्शा की व्यवस्था की जा रही है।

माँ बेतवा की महा-आरती

महोत्सव में राज्य सरकार बेतवा के महत्व को सभी लोगों के बीच ले जाने का प्रयास करेगी। महोत्सव में 7 मार्च की शाम को सभी प्रतिनिधियों  कंचना घाट पर बेतवा की महा-आरती में शामिल होंगे। यहीं पर शुभा मुद्गल का गायन होगा। इसके बाद लगभग 500 वर्ष पुराने कल्पवृक्ष को भी दिखाया जायेगा तथा कल्पवृक्ष के पास संगीत कार्यक्रम  होगा।

खुलेंगे विकास के द्वार

ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज ओरछा को महोत्सव के लिये तैयार किये जा रहे संसाधनों का समुचित लाभ मिले, इसके लिये सरकार फिल्म, विवाह ,पर्यटन  सहित अन्य ऐसे ही उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों  को भी आमंत्रित कर रही है। इसके साथ, तमाम अधिकारियों की 7 मार्च की दोपहर में सभा होगी। इसमें इन्हें ओरछा में आकर निवेश करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। आठ मार्च की शाम बुंदेली भोजन के हाट के साथ 'नमस्ते ओरछा'' महोत्सव का समापन होगा।

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एएबी समाचार। भारत देश में दुशहरा  पर्व के समय रामलीला का आयोजन कोई नई बात नहीं है पर मप्र के बुंदेलखंड अंचल के गाँव देवलचौरी में ख़ास शीत ऋतु में ही रामलीला मंचन की  सौ साल से भी पहले से चली आ रही परंपरा अपने आप में देश की अनूठी मिसाल बनती नजर आ रही है । गांव के तिवारी परिवार द्वारा शुरू किया गया  रामलीला के इस आयोजन को देखने की लिए हर साल  आसपास के गांव के अलावा शहर से भी हजारों लोग पहुंचते  हैं।
 देवालचौरी गाँव के एक युवा मधुर तिवारी ने बताया की रामलीला के इस आयोजन की एक और बड़ी खूबी इस मंचन में किरदार निभाने के लिए कोई जाति बंधन नहीं होता है । रामलीला में रावण के जैसा अहम किरदार भी  गांव के चौकीदार (कोटवार) वीरन चढ़ार निभाते हैं जो अशिक्षित होने के बावजूद भी बिना रुके एक स्वर में संस्कृत मन्त्रों का  उच्चारण करते हैं। इस रामलीला के  सभी किरदार गांव के लोग निभाते हैं। उन्होंने बताया की  रामलीला की शुरुआत से समापन के दिन तक सिर्फ आयोजन स्थल ही नहीं आस पास के गाँव में भी भक्ति भाव का माहौल बना रहता है ।
रामलीला में मुख्य किरदार राम- जयदीप तिवारी, लक्ष्मण ऋषभ गौतम, सीता प्रशांत गौतम, विश्वामित्र रवींद्र तिवारी, वाणासुर प्रभु तिवारी, व्यासगादी पर मुकुल तिवारी और चंद्रेश तिवारी, इसके अलावा स्वयंबर में राजाओं का किरदार निभाने वालों में नीरज तिवारी, मनहरण तिवारी, हरिराम विश्वकर्मा, दयाराम सेन, मुरारी पटेल, नरेश पटेल, सरवन चढ़ार, हीरा पटेल निभाए ।
- इनका रहा विशेष योगदान
मनमोहन तिवारी, डॉ. महेश तिवारी, मनोज तिवारी, सरपंच मयंक तिवारी सहित तिवारी परिवार के अन्य लोग व गांव के लोगों का सहयोग रहा।