Free Competition 'science through my eyes' : पंद्रह जुलाई तक जमा की जा सकेंगीं प्रविष्टियाँ
एएबी समाचार । विज्ञान में अभिरुचि रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। “साइंस थ्रू माई आईज” (Science Through My Eyes) विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की छाया-चित्र / चित्रकारी व एक मिनिट अवधि की फिल्म निर्माण बनाना है । प्रतियोगिता में केवल भारतीय नागरिक हिस्सा ले सकते हैं । प्रतियोगिता के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगेगा। प्रविष्टियां 30 जून, 2020 से 15 जुलाई, 2020 के बीच सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक स्वीकृत की जायेंगीं।
Free Competition 'science through my eyes' : रचनात्मकता को बल देगी प्रतियोगिता
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) और विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) इस प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। प्रतियोगिता का मकसद लोगों को उनके विषय से हटकर अपने आसपास के विज्ञान को देखने, समझने और उसकी सराहना करने में सहायता करना है। एक समीक्षात्मक नजर वैज्ञानिक भावना व अनुसंधान में रुचि को बढ़ावा देने और रचनात्मक क्षमताओं को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी।
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Free Competition 'science through my eyes' :कोविड -19 पर भी रचनाएँ स्वीकार्य होंगीं
प्रतियोगिता के विषय “साइंस थ्रू माई आईज” के तहत कोई भी उपयुक्त उप-विषय चुना जा सकता है। उप-विषयों के कुछ उदाहरण हैं रसोई, खेल, प्रयोगशाला, अस्पताल, घर पर या काम पर विज्ञान हैं। इसके अलावा कोविड-19 वायरस, स्वस्थ जीवन, भू-विरासत, स्वास्थ्य, आकर्षक स्थान और मुख्य विषय के अंतर्गत आने वाले किसी भी विषय से संबंधित कार्य भी शामिल हो सकता है।
Free Competition 'science through my eyes' : दमदार विषय है
डीएसटी सचिव, प्रोफेसर आशुतोष शर्मा के मुताबिक "हर जगह विज्ञान और सभी के लिए विज्ञान के माध्यम से विज्ञान का लोकतंत्रीकरण एक दमदार विषय है । यह बड़े पैमाने पर समाज में वैज्ञानिक स्वभाव को विकसित करने में मददगार होगा । साथ ही गुणवत्ता, नवीन ज्ञान की खोज में युवाओं को प्रेरित करेगा । विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की आर्थिक जरूरतों में भी योगदान देगा।”
Free Competition 'science through my eyes' :केवल भारतीयों के लिए है प्रतियोगिता
केवल भारतीय नागरिकों के लिए खुली इस प्रतियोगिता में कोई प्रवेश शुल्क नहींलिया जायेगा । प्रवेश 3 समूहों बनाये गए हैं पहला, किसी भी विषय में डॉक्टरेट छात्र (पीएचडी) और पोस्ट-डॉक्टरल फेलो, जो किसी भी विषय में एमबीबीएस, एमएस, एमडी, एम टेक, एमबीए जैसी पेशेवर डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हैं, दूसरा प्रैक्टिसिंग वैज्ञानिक हैं और तीसरा किसी भी अन्य तरह का पेशेवर काम कर रहे डॉक्टर, इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, फिल्म-निर्माता, पैरा-मेडिको… आदि हैं। प्रतियोगिता में दो की एक टीम भी बनाई जा सकती है। प्रविष्टि किसी व्यक्ति या 2 व्यक्तियों की टीम के नाम पर हो सकती है।
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